जब भी ईदुल अज़हा यानी बक़रीद आती है कुछ चैनल्स ,कुछ नेताओं के लिए मुद्दा मिल जाता है। अभी किसी नेता ने राय दिया मुसलमान अपने बच्चों की कुर्बानी दें।। दर असल मानव बलि को ही रोकने के लिए एक प्रकार से ये क़ुरबानी है।
मैं वाल्मीकि रामायण श्रद्धा से पढ़ता हूँ और इस रामायण,कालिदास की कृत्यों तथा मनुस्मृति में एक तार से जोड़ने वाली भाषा और तथ्यों को मै ने पाया है। यदि नेताजी ने श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण के प्रथम खंड के एक्शष्टितमः सरगः का अध्यन किया होता। आरम्भ में ही लिखा है", विश्वमित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ पशु बनाने के लिए ख़रीद कर लाना।"
यह सरगः ही आरम्भ होता है रामजी की उपस्थिति से जहां यज्ञ के निमित बनवासी ऋषि पधारे हुए हैं परन्तु यज्ञ पशु के इन्द्रजी द्वारा "चुरा लिया" गया ।
24 वें पद में है:-
सदस्यानुमते राजा पवित्रकृतलक्षणम ।
पशु रक्ताम्बरं कृत्या यूपे तं सम्बन्धयत।।
अर्थात यहां सदस्य की अनुमति ले राजा अम्बरीष ने शुनःशेप को
कुश के पवित्रपाश से बांधकर उसे पशु के लक्षण से सम्पन्न कर दिया और यज्ञ पशु को लाल वस्त्र पहिनाकर यूप में बांध दिया।
यही नहीं पद 11 में लिखा है," तुम सबके सब पुण्यात्मा हो । अतः राजा के यज्ञ में पशु बनकर अग्निदेव को तृप्ति प्रदान करो।"
अग्नि में बलि अन्य देशों में भी व्याप्त थी।ओल्ड टेस्टामेंट के बुक ऑफ लेविटिक्स की शरुआत ही sacrifice से होती है। जलाकर बलि देने को सर्वश्रेस्ठ बलि यानी holocaust कहते थे। इस प्रकार बाइबिल के कमंडमेन्ट का प्रभाव यहूदी और ईसाई दोनों पर होना था। ज्ञात हो कि ओल्ड टेस्टामेंट ही Torah यानी तौरेत है जिसे यहूदी मानते हैं और मुसलमान भी परन्तु मुसलमान वर्तमान स्वरूप को नहीं मानते हैं चूंकि यह मूल में उपलब्ध नहीं है ।जेम्स स्टैण्डर्ड बाइबिल 1611 में एक कमीशन के 6 वर्ष के संशोधन और संवर्धन के बाद बनी।
नर बलि या अग्नि में बलि को इस्लाम ने समाप्त किया।
मृणाल पांडेय एक बहुत ही सफल पत्रकार,साहित्यकार, विदुषी और टेलीविजन से लेकर एखबारो पर अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में छाई रही हैं। पद्मश्री से नवाज़ी गई उनकी माताजी शिवानी प्रसिद्ध लेखिका रही हैं जिनके गुरु हज़ारी प्रसाद द्विवेदी थे।अप्रैल 16,2017 के स्क्रॉल में मृणाल जी का एक लेख आया है जो बृहत जानकारी देता है। लिखती हैं कि वेदों में 50 पशुओं को बलि देने और इस प्रकार से उनके मांस के सेवन का ज़िक्र है।
उन्होंने बाजार में विभिन प्रकार के पशुओं के मांस के स्टाल का नाम दिया है यथा:--
Gogataka, arabika, shookarika, nagarika, शकुन्तिका।
उन्होंने लिखा है कि 162 वां hymn ऋग्वेद के सम्राटों द्वारा बलि देने का पूर्ण ब्यौरा देता है।
गौतम बुद्ध ने ,मृणाल के अनुसार, मांस खाना मना नहीं किया यदि भीकुओं को भीख में मिले। यानी भिक्षुओं की उपस्थिति में बद्ध नहीं हो।
देवदत्त ने अलग संघ इसलिए ही बनाया कि 5 शर्तों में बुद्ध के समक्ष यह शर्त भी थी कि मछली और मांस नहीं खाया जाय जिसे बुद्ध नहीं माने।
डॉ अमबेडकर ने कहा कि," Need to kill or will to kill" में अंतर है।
ज़रूरत पड़ी तो सरकारों ने पैसे देकर सैंकड़ों नील गायों को मरवा दिया। इसी केंद्र सरकार की अनुमति पर।
क़ुर्बानी शब्द हिब्रू के Qorban से आता है और इस पर तथा उत्तर प्रदेश में 200 बच्चों की बलि पर भी एक ख़बर से अवगत कराएंगे। बीबीसी का रिपोर्ट नर बलि पर भी।
हाँ क़ुर्बानी का अर्थ है कि हम अपने अंदर की बुराइयों और त्रुटियों को क़ुर्बान करें।
पुनश्चः
अब्दुल हफ़ीज़ ख़ान
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